परिचय

ग्वालियर जिला ,जो ग्वालियर के राजस्व संभाग में आता है ,राज्य के उत्तरी भाग में २५ ० ३४’ उ० और २६० २१’ उ० अक्षांश तथा ७७० ४०’ पू० और ७८० ५४’ पू० देशांश के बीच स्थित है । यह २००२ वर्गमील क्षेत्र में फैला हुआ है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का १.१ प्रतिशत से कुछ अधिक है।

जिले का नाम एक समतल शिखर वाली एकाकी पहाड़ी पर बने हुए एक शिला-निर्मित ऎतिहासिक किले के नाम पर पड़ा हैं, जिसे इस क्षेत्र में मह्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। जिस पहाड़ी पर यह किला बना हुआ है, मूलतः उसे ’गोपाचल’,’गोपगिरि’.’गोप पर्वत’ या गोपाद्रि कहा जाता था ।

ग्वालियर मध्य प्रदेश का एक ऎतिहासिक स्थान हैं जो कि उत्तर में मुरैना जिले से पशिचम में शिवपूरी पूर्व में भिंड तथा दक्षिण में दतिया जिले से धिरा हुआ हैं । ग्वालियर जिले में तीन तह्सीलें हैं, ग्वालियर(गिर्द), डबरा तथा भितरवार एवं चार विकासखंड है घांटीगांव(बरई), मुरार, डबरा तथा भितरवार ।

ग्वालियर जिले में तीन नगर पंचायत है,बिलौआ,पिछोर एवं आंतरी तथा दो नगरपालिका डबरा व भितरवार एंव ग्वालियर नगरनिगम है। इस जिले की अधिकतम जनसंख्या शहरी क्षेत्र में निवास करती है । इस जिले में कुल 300 ग्राम पंचायत है. एवं 660 ग्राम है जिनमें से 598 आबाद ग्राम है व 62 वीरान है ।

ग्वालियर क्षेत्र विशेषतः बलुआ ,पत्थर ,मिट्टी,गेरू,कांच बनाने की बालु ,कपड़ा,चमड़ा आदि की दृष्टि से समृद है । जीवाजी विश्वविद्दलय की स्थापना ग्वालियर में सन १९६४ में हुई । ग्वालियर सन १९४८ से १९५६ तक मध्य भारत की राजधानी रहा लेकिन जब मध्य भारत मध्य प्रदेश में जुड़ा तब इसे जिले का स्वरुप दिया गया. सन 2001 की जनगणना के अनुसार ग्वालियर जिले की जनसंख्या 1629881 है।